आरबीआई और सरकार ने रुपये को समर्थन देने तथा बाह्य जोखिमों पर अंकुश लगाने के लिए समन्वित कदमों की घोषणा की
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार ने कथित तौर पर रुपये को समर्थन देने और बाह्य क्षेत्र की कमजोरियों को संभालने के उद्देश्य से कदमों का एक पैकेज साथ-साथ लागू किया है।[1] इनमें कुछ विदेशी मुद्रा-संबंधी लेनदेन पर लक्षित कर-छूट और निर्यातकों व आयातकों के लिए हेजिंग साधनों तक बढ़ी हुई पहुंच शामिल है।[1] इन उपायों का उद्देश्य लेनदेन लागत कम करना, घरेलू डेरिवेटिव बाजार को गहरा करना और विदेशी मुद्रा जोखिम वाले कॉरपोरेट्स के लिए जोखिम प्रबंधन आसान बनाना है।[1] वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे अस्थिर पूंजी प्रवाह, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण भारत के चालू खाते और मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है।[1] यह दृष्टिकोण राजकोषीय और नियामकीय हस्तक्षेपों का मिश्रण है, जिसमें आरबीआई वित्त मंत्रालय के साथ घनिष्ठ समन्वय कर रहा है।[1] अधिकारियों ने इन कदमों को प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-निरोधात्मक बताया है, ताकि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनी रहे। आने वाले हफ्तों में बाजार प्रतिभागी देखेंगे कि इन कदमों का रुपये की अस्थिरता और हेजिंग उत्पादों की मांग पर क्या असर पड़ता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह नीतिगत मिश्रण आगामी मौद्रिक और बजटीय चर्चाओं में भी प्रमुखता से सामने आ सकता है।
प्रश्न हल करें
आरबीआई और सरकार द्वारा हाल में उठाए गए समन्वित उपायों का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
उत्तर: (b) रुपये को समर्थन देना और बाह्य जोखिमों का प्रबंधन करना
The correct answer is (b) रुपये को समर्थन देना और बाह्य जोखिमों का प्रबंधन करना.