भारत ने हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम में स्क्रैमजेट की महत्वपूर्ण सफलता हासिल की
भारत ने **हाइपरसोनिक हथियारों** के विकास में **स्क्रैमजेट इंजन** तकनीक में सफल प्रगति के साथ एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जिससे वह अमेरिका, चीन और रूस सहित ऐसे सिस्टम विकसित करने वाले कुछ चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।[1] यह विकास भारत के व्यापक लंबी दूरी की सटीक प्रहार क्षमता और अगली पीढ़ी के मिसाइल कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से DRDO और उससे जुड़े रक्षा प्रयोगशालाएँ कर रही हैं।[1] हाइपरसोनिक हथियार Mach 5 से अधिक गति से चलते हैं और अत्यधिक गतिशील होते हैं, जिससे उन्हें मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों से पहचानना और रोकना कठिन हो जाता है।[1] यह नवीनतम सफलता भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और भविष्य की हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों तथा बूस्ट-ग्लाइड वाहनों में सहायक होगी।[1] विश्लेषकों का कहना है कि उच्च-तापमान सामग्री, उन्नत मार्गदर्शन, और हाइपरसोनिक गति पर निरंतर स्क्रैमजेट दहन पर तकनीकी महारत प्रमुख चुनौतियाँ हैं, जिन्हें भारत अब क्रमशः पार कर रहा है।[1] यह विकास आगे के परीक्षणों, सशस्त्र बलों के साथ उपयोगकर्ता परीक्षणों, और बहुपक्षीय व्यवस्थाओं में संभावित निर्यात-नियंत्रण बहसों को भी बढ़ावा दे सकता है। यह क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन की गतिशीलता, विशेषकर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा वातावरण में, भी योगदान देता है। परीक्षाओं के लिए हाइपरसोनिक तकनीक, स्क्रैमजेट इंजन, DRDO की भूमिका, और बैलिस्टिक/क्रूज़ मिसाइलों से तुलना को समझना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न हल करें
हाइपरसोनिक हथियार सामान्यतः किस गति से अधिक वाले सिस्टम को कहा जाता है?
उत्तर: (c) Mach 5
The correct answer is (c) Mach 5.