करंट अफेयर्स 26 जुलाई 2026

संक्षेप में

  • NTA को जारी परीक्षा सुधारों के बीच यूजीसी-नेट पेपर लीक के नए आरोपों का सामना
  • जून CPI के 4% लक्ष्य से ऊपर जाने की आशंका से RBI से जुड़ी मुद्रास्फीति चिंता

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मुख्य खबरें

GOVERNANCE

NTA को जारी परीक्षा सुधारों के बीच यूजीसी-नेट पेपर लीक के नए आरोपों का सामना

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) पर यूजीसी-नेट परीक्षा में पेपर लीक के नए आरोप लगे हैं, जिससे भारत की केंद्रीय परीक्षा-आयोजन संस्था पर जांच और तेज हो गई है।[6] ये दावे NEET-UG परीक्षा से जुड़ी हालिया विवादों और अन्य NET पेपरों में रिपोर्ट की गई त्रुटियों के तुरंत बाद सामने आए हैं, जिससे उच्च-दांव वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर प्रणालीगत चिंताएँ बढ़ गई हैं।[6] इस मुद्दे ने सुरक्षा प्रोटोकॉल, डिजिटल प्रणालियों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के मानक संचालन तरीकों की मजबूती पर बहस छेड़ दी है। छात्र, शिक्षक और सांसदों सहित हितधारकों ने परीक्षा प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता, स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग की है। बताया जा रहा है कि सरकार NTA की प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रही है और भरोसा बहाल करने के लिए तकनीकी व नियामकीय सुधारों पर विचार कर रही है। विपक्षी दल के इस मामले को संसद में उठाने और शिक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगने की संभावना है। यह विवाद केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली पर आगामी नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकता है, जिसमें NTA के पुनर्गठन या उसे अधिक मजबूत वैधानिक समर्थन दिए जाने की संभावना भी शामिल है। अभ्यर्थियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूजीसी-नेट से देशभर में Assistant Professorship और Junior Research Fellowship के लिए पात्रता मिलती है।

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यूजीसी-नेट परीक्षा का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?

ECONOMY

जून CPI के 4% लक्ष्य से ऊपर जाने की आशंका से RBI से जुड़ी मुद्रास्फीति चिंता

अर्थशास्त्रियों के एक Reuters सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की जून महीने की उपभोक्ता मुद्रास्फीति पहली बार 16 महीनों में भारतीय रिज़र्व बैंक के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य को पार कर सकती है।[1] खाद्य और ईंधन की ऊँची कीमतों को वृद्धि का प्रमुख कारण बताया गया है, जिसे कमजोर मानसून और ऊर्जा लागत को प्रभावित करने वाली वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने और बढ़ाया है।[1] सर्वेक्षण संकेत देता है कि headline CPI RBI की सहनशीलता सीमा के ऊपरी छोर के करीब पहुँच सकता है, जिससे भविष्य के दर निर्णयों पर सवाल उठते हैं। मौद्रिक नीति निर्माता मुद्रास्फीति प्रबंधन और विकास संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे। यदि मुद्रास्फीति लंबे समय तक ऊँची रहती है, तो यह घरेलू बजट, वास्तविक आय और उपभोग मांग को प्रभावित कर सकती है। यह विकास राजकोषीय नियोजन और खाद्य व ईंधन बाजारों में सरकारी हस्तक्षेप के लिए भी प्रासंगिक है। अर्थशास्त्री आगामी आधिकारिक आँकड़ों और RBI के संचार पर नीति दिशा के संकेतों के लिए नज़र रख रहे हैं। यह स्थिति inflation trajectories, CPI components और RBI के inflation-targeting framework को प्रतियोगी परीक्षा तैयारी के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

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भारत के flexible inflation-targeting framework के तहत RBI का मध्यम अवधि CPI मुद्रास्फीति लक्ष्य किस स्तर पर निर्धारित है?

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