करंट अफेयर्स 10 सितंबर 2026

संक्षेप में

  • कैबिनेट ने पांच राज्यों में रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को 10,783 करोड़ रुपये की मंजूरी दी
  • महाराष्ट्र भूमि अभिलेख परिसंपत्ति टोकनीकरण के माध्यम से भारत का पहला “tokenised state” बनने की ओर

…और 9 खबरें (GOVERNANCE, POLITY, SOCIAL)।

मुख्य खबरें

INFRASTRUCTURE

कैबिनेट ने पांच राज्यों में रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को 10,783 करोड़ रुपये की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को लगभग 10,783 करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी है[1]. ये परियोजनाएं पांच राज्यों के 14 जिलों को कवर करेंगी, जिनका उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर क्षमता बढ़ाना तथा माल और यात्री आवागमन को बेहतर बनाना है[1]. मल्टीट्रैकिंग में आमतौर पर मौजूदा कॉरिडोर पर रेल लाइनों को दोगुना, तिगुना या चौगुना करना शामिल होता है, ताकि भीड़ कम हो और देरी घटे. यह मंजूरी आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क के प्रमुख चालक के रूप में रेल अवसंरचना पर जारी जोर को दर्शाती है. इन परियोजनाओं से निर्माण चरण के दौरान रोजगार सृजन और पूरा होने के बाद लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार की भी उम्मीद है. विशिष्ट कॉरिडोर और समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी संक्षिप्त सुर्खियों में पूरी तरह नहीं दी गई थी, लेकिन संभव है कि रेल मंत्रालय बाद की अधिसूचनाओं में इसे जारी करे[1].

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने हाल ही में लगभग कितनी लागत वाली तीन रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी?

GOVERNANCE

महाराष्ट्र भूमि अभिलेख परिसंपत्ति टोकनीकरण के माध्यम से भारत का पहला “tokenised state” बनने की ओर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य भूमि अभिलेखों के परिसंपत्ति टोकनीकरण को लागू करके भारत का पहला “tokenised state” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है[4]. इस संदर्भ में परिसंपत्ति टोकनीकरण का अर्थ भूमि अभिलेखों को सुरक्षित डिजिटल टोकनों में बदलना है, ताकि डिजिटल प्लेटफार्मों पर उन तक आसान पहुंच, समीक्षा और संभवतः लेनदेन प्रक्रिया संभव हो सके[4]. इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, भूमि स्वामित्व में धोखाधड़ी और विवादों को कम करना तथा राजस्व प्रशासन का आधुनिकीकरण करना है. यह राज्य द्वारा अपनाए जा रहे व्यापक डिजिटल शासन और भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण एजेंडे का हिस्सा है. राज्य स्तर पर ऐसी पहली पहल होने के कारण, यदि यह सफल रहती है तो महाराष्ट्र की परियोजना अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकती है. प्रौद्योगिकीय ढांचे, कानूनी रूपरेखा और कार्यान्वयन समय-सारिणी का विवरण अभी सामने आ रहा है, लेकिन यह घोषणा एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है[4].

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किस भारतीय राज्य ने भूमि अभिलेखों के परिसंपत्ति टोकनीकरण के माध्यम से देश का पहला “tokenised state” बनने की योजना की घोषणा की है?

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